REAL SHAKTIMAAN ( STORY )
20TH to 21ST CENTURY
REAL LIFE ( The Untold Story ) JHARKHAND, INDIA
20 वीं सदी की बात है ।
भारत देश के बिहार राज्य में एक गाव बसा हुआ था। उस गाव का नाम था 'हुण्डरू' ।
हुण्डरू गांव आदिवासी , अनुसुचित गांव था।
यहां के आदिवासी लोग सरल जीवन यापन कर रहे थे। जंगलों वन उपजों से जीवन चल रहा था।
गरीबी बहुत ज्यादा थी। कुछ लोग पैसा शहरों में रोजाना जाते थे और कुछ लोग शहरों में ही रुककर काम करके पैसा कमाते थे और त्योहारों में गाव आते थे। अलग अलग त्योहारों में गाव आते त्योहारों को मानते और फिर शहरों में चले जाते।
गाव के लोग खेतीबाड़ी करते,सब्जी उगाते और स्थानीय बाजारों में बेचकर, जरूरत का सामान खरीदकर घर परिवार चलते रहे थे
और जीवन यापन कर रहे थे।
गाव के लोग खेतीबाड़ी करते,सब्जी उगाते और स्थानीय बाजारों में बेचकर, जरूरत का सामान खरीदकर घर परिवार चलते रहे थे
और जीवन यापन कर रहे थे।
Hundru गाव में ही जन वितरण प्रणाली की दुकान चल रहीं थीं।
गाव के लोगों को और आमने सामने के गाव के लोगों को सरकार की और से राशन कार्ड के माध्यम से जन वितरण प्रणाली की दुकान से चावल, मिट्टी तेल, नमक आदि मिल रहा था जिससे गरीब लोगों को जीवन यापन करने में सहयोग मिल रहा था।
गाव के लोग साप्ताहिक बाजार,जैसे, सिकिदिरी, गेतलसूद बाजारों से जरूरत का समान खरीदते थे।
गाव के लोग जंगल से लकड़ी काटते और महिलाएं सर पर लकड़ी का बोझा ढोकर सिकिदिरी बाजार जाते जरूरत का समान खरीदकर लाते थे, पुरुष लोग भी साइकिल से लकड़ी का बोझा बाँधकर सिकिदिरी बाजार जाते और जरूरत का समान खरीदकर लाते थे और अपना परिवार चलाते थे।
गाव के लोग खेती-बाड़ी भी करते और बाजारों में बेचते और परिवार का गुजारा करते थे।
आदिवासी क्षेत्र और जंगल क्षेत्र होने के कारण, पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बड़े पैमाने पर खेती-बाड़ी नहीं हो पाती थी।
सन 1997 में जन्म हुआ एक बच्चा- जिसका नाम रखा गया सोनु बेदिया ।
सोनु बचपन से ही सरल स्वभाव का था और मंदबुद्धि था।
सोनु को पढाई में मन बहुत कम लगता था।
सोनु का मन खेलने में ज्यादा लगता था।
सोनु स्कूल से हमेशा बचता था।
स्कूल नहीं जाने के लिए अलग-अलग उपाय निकालता था।
स्कूल नहीं जाने के लिए अलग-अलग जगह पर छिप जाता था।
कभी स्कूल जाते समय सड़क के किनारे पेड़ पर चढकर छिप जाता, तो कभी फसल के खेतों में छिप जाता और गाव के सभी विद्यार्थियों को जाने देने के बाद फिर घर आ जाता और गाव के बच्चों के साथ खेलता और फिर रात को घर नहीं आता तो कहीं छिप कर बैठा रहता।
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